सावधान! UKSSSC की परीक्षाओं के नाम पर फैल रही है गलत जानकारी

देहरादून : उत्तराखण्ड में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को गुमराह करने की एक और कोशिश सामने आई है। सोशल मीडिया पर इन दिनों उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) के नाम से एक कथित आदेश तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें विभिन्न भर्ती परीक्षाओं की तिथियों को लेकर गलत जानकारी दी गई है। आयोग ने इस पत्र को पूरी तरह फर्जी करार देते हुए अभ्यर्थियों से सतर्क रहने की अपील की है।

दरअसल, राज्य में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सामने आए पेपर लीक मामलों और भर्ती घोटालों के कारण युवा पहले से ही भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे माहौल में सोशल मीडिया पर प्रसारित इस फर्जी पत्र ने कई अभ्यर्थियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी।

वायरल दस्तावेज में दावा किया गया है कि विशेष तकनीकी अर्हता के विभिन्न पदों के लिए आयोजित होने वाली लिखित परीक्षा 3 मई को कराई जाएगी। वहीं स्नातक स्तरीय पुनर्परीक्षा की तिथि 4 सितंबर 2026 दर्शाई गई है। पत्र को इस तरह तैयार किया गया कि वह पहली नजर में आयोग का आधिकारिक आदेश प्रतीत हो। इतना ही नहीं, उसमें आयोग के पूर्व सचिव के हस्ताक्षर भी लगाए गए, जिससे उसकी विश्वसनीयता बढ़ाने की कोशिश की गई।

सोशल मीडिया पर पत्र वायरल होने के बाद कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा कार्यक्रम को लेकर संशय जताया और आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। मामले के सामने आते ही आयोग ने इसकी जांच की और साफ किया कि वायरल पत्र का आयोग से कोई लेना-देना नहीं है।

आयोग के आधिकारिक परीक्षा कैलेंडर के अनुसार स्नातक स्तरीय पुनर्परीक्षा 14 जून 2026 को प्रस्तावित है, जबकि विशेष तकनीकी अर्हता से संबंधित विभिन्न पदों की लिखित परीक्षा 28 जून 2026 को आयोजित की जानी है। ऐसे में वायरल पत्र में दी गई दोनों तिथियां पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन हैं।

यूकेएसएसएससी अध्यक्ष जी.एस. मार्तोलिया ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि अभ्यर्थियों तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए जल्द ही स्पष्ट सूचना जारी की जाएगी, ताकि किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

आयोग ने सभी अभ्यर्थियों से अपील की है कि भर्ती और परीक्षाओं से जुड़ी किसी भी सूचना पर विश्वास करने से पहले उसकी पुष्टि आयोग की आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत माध्यमों से अवश्य करें। सोशल मीडिया पर वायरल संदेशों और अप्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर कोई निर्णय लेना नुकसानदायक साबित हो सकता है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल आधिकारिक रूप से जारी सूचनाओं को ही अंतिम और प्रमाणिक माना जाए। यह संस्करण समाचार वेबसाइट, पोर्टल या अखबार में प्रकाशित करने के लिए अधिक पेशेवर और मौलिक शैली में तैयार किया गया है।

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