शिक्षा व्यवस्था : रडुवा प्राथमिक विद्यालय में छात्र एक, दो शिक्षिकाएं

गोपेश्वर (चमोली)। पोखरी ब्लाॅक का राजकीय प्राथमिक विद्यालय रडुवा बंदी की कगार पर पहुंच गया है। विद्यालय में एक छात्र पर दो शिक्षिकाएं तैनात हैं। वर्ष 1835 में स्थापित राजकीय प्राथमिक विद्यालय रडुवा प्रधानाध्यापिका तथा ग्रामीणों के बीच विवाद के चलते सुर्खियों में आया है। अंग्रेजों के जमाने में स्थापित यह विद्यालय कभी शिक्षा के क्षेत्र में अलख जगाने वाला विद्यालय माना जाता था। मौजूदा दौर में छात्र संख्या घट कर मात्र एक रह गई है। विद्यालय में प्रधानाध्यापिका समेत दो अध्यापिकाएं तैनात हैं। प्रधान मनीषा देवी और क्षेत्र पंचायत सदस्य चंद्रकला के नेतृत्व में ग्रामीणों ने उप शिक्षा अधिकारी से मिलकर प्रधानाध्यापिका के स्थानांतरण की मांग की है। आरोप है कि विद्यालय में अव्यवस्थाएं व्याप्त है। निर्माण कार्यों में घपला घोटाला हुआ है।

बताते चलें कि कभी हापला घाटी, त्रिशूला घाटी तथा खदेड पट्टी के कांडई-चंद्रशिला, रडुवा, डुंगर, बंगथल, तोणजी, सलना, डांडा, किमोठा, भिकोना समेत दर्जनों गांवों के छात्रों के लिए यह विद्यालय शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। अविभाजित उत्तर प्रदेश में पर्वतीय विकास मंत्री रहे स्व. नरेंद्र सिंह भंडारी, गढ़वाल के जिला पंचायत अध्यक्ष रहे श्रीधर आजाद, डा. पाती राम परमार और नरेंद्र किमोठी समेत कई प्रमुख हस्तियों ने इसी विद्यालय से शिक्षा ग्रहण की थी। अब यह विद्यालय बंदी के कगार पर पहुंच गया है। ग्रामीणों ने 10 फरवरी को जीआईसी रडुवा में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित जनता दरवार तथा 13 फरवरी को उप शिक्षा अधिकारी नेहा भट्ट को ज्ञापन सौंप कर प्रधानाध्यापिका के तबादले और निर्माण कार्यों के जांच की मांग की थी। उप शिक्षा अधिकारी ने जीआईसी नागनाथ के प्रधानाचार्य जीएल सैलानी को जांच अधिकारी नियुक्त किया था। टीम ने विद्यालय पहुंच कर प्रधानाध्यापिका और ग्रामीणों के बयान दर्ज किए थे। चेतावनी दी थी कि यदि प्रधानाध्यापिका का तबादला नहीं किया गया तो ग्रामीण अपने बच्चों को विद्यालय नहीं भेजेंगे। प्रधानाध्यापिका के हटते ही छात्र संख्या बढ़ जाएगी।  

इस अवसर पर पूर्व प्रधान रजना देवी, मोहन सिंह बत्र्वाल, दशरथ बत्र्वाल, तेजराम भट्ट, दिनेश रडवाल, अमरदेव भट्ट, दिनेश रडवाल, महिला मगल दल अध्यक्ष विनीता देवी,   माघू लाल, बृजेश कुमार, हरीश रडवाल, सज्जन रडवाल, कल्पेश्वरी देवी, राजकुमारी देवी, अनीता देवी, लक्ष्मी देवी, राजेश्वरी देवी, सरिता देवी, ऊषा देवी, लक्ष्मी देवी, शशि देवी, गुड्डी देवी, हेमा देवी, लीला देवी, सीमा देवी, सुधा देवी, सुशीला देवी आदि शामिल रहे।

जांच अधिकारी जीएल सैलानी ने बताया कि ग्रामीणों में प्रधानाध्यापिका के प्रति आक्रोश है। जांच रिपोर्ट खंड शिक्षा अधिकारी को सौंपी जाएगी। इसके बाद अंतिम निर्णय जिलास्तर से लिया जाएगा।

उप शिक्षा अधिकारी नेहा भट्ट ने कहा कि जांच समिति की रिपोर्ट मिलने पर मामले को   जिला  शिक्षा अधिकारी को अग्रसारित किया जाएगा।

प्रधानाध्यापिका पवित्रा टम्टा ने सभी आरोपों को निराधार और बेबुनियाद बताते हुए कहा कि यह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि वे किसी भी स्तर की जांच के लिए तैयार हैं। 

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