ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच तेल $110 के पार जाने से शेयर बाजार में हाहाकार, डूबे ₹12 लाख करोड़

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के तेज़ होने से सोमवार (9 मार्च 2026) को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स और निफ्टी में 3% से अधिक की जोरदार टूट देखी गई, जिससे निफ्टी 24,000 के स्तर से नीचे फिसल गया।

सुबह के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 2,300 से अधिक अंकों की गिरावट के साथ 76,750 के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 23,700 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में बिकवाली का दबाव इतना अधिक रहा कि निफ्टी50 के 48 शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे, जबकि केवल कोल इंडिया और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे कुछ ही शेयर हल्की तेजी दिखा रहे थे। आईटी, बैंकिंग, एफएमसीजी, इंफ्रा, फार्मा और रेलवे सेक्टर समेत सभी प्रमुख सेक्टरों में भारी बिकवाली देखी गई।

इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है, जहां ईरान-अमेरिका संघर्ष के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया। ब्रेंट क्रूड 25% से अधिक चढ़कर 115-119 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड भी 113 डॉलर के पार चला गया। यह जुलाई 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है। सप्लाई चेन में रुकावट की आशंका, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से तेल परिवहन प्रभावित होने से, वैश्विक बाजारों में दहशत फैल गई।

एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट आई—दक्षिण कोरिया का कोस्पी 7% से अधिक टूटा, जबकि जापान का निक्केई 6.5% नीचे आ गया। गिफ्ट निफ्टी ने भी सुबह 3% से अधिक की गिरावट का संकेत दिया था। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली जारी रही—शुक्रवार को उन्होंने 6,030 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। रुपये में भी कमजोरी आई और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.28 के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया। इंडिया VIX में 21% से अधिक की तेजी आई, जो बाजार में बढ़ती अस्थिरता का संकेत दे रही है।

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) जैसे IOC, BPCL और HPCL के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई, क्योंकि उच्च कच्चे तेल की कीमतों से उनके मार्जिन पर दबाव बढ़ा। हालांकि, सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाने का भरोसा दिया है। ऊपरी तेल कंपनियां जैसे ONGC फिलहाल गेनर्स रहीं।

जियोपॉलिटिकल इन्वेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रेटेजिस्ट आनंद जेम्स ने चेतावनी दी कि निफ्टी 23,535 के स्तर को तोड़ने पर गिरावट और गहरा सकती है, जो 22,000 या इससे भी नीचे 19,000 तक जा सकती है। तेजी की संभावना 24,000 से ऊपर टिके रहने पर निर्भर है। घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) बाजार में सपोर्ट देने की कोशिश कर रहे हैं और हाल के सत्रों में 58,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश किया है।

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