देहरादून महायोजना-2041 : जनता के सुझावों से आकार ले रहा राजधानी का भविष्य, 10वें दिन हुडा कार्यालय में हुई जनसुनवाई, नागरिकों ने रखे विकास से जुड़े अहम सुझाव

देहरादून : मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा तैयार की जा रही देहरादून महायोजना-2041 को जनआकांक्षाओं के अनुरूप अंतिम स्वरूप देने के उद्देश्य से चलाया जा रहा जनसंवाद अभियान लगातार गति पकड़ रहा है। इसी क्रम में शनिवार को अभियान के दसवें दिन उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण (हुडा) कार्यालय, राजीव गांधी कॉम्प्लेक्स, तहसील चौक में जनसुनवाई आयोजित की गई। कार्यक्रम में संबंधित अधिकारी पूरे समय मौजूद रहे और नागरिकों द्वारा प्रस्तुत शिकायतों, सुझावों एवं आपत्तियों को विस्तार से सुना। लोगों ने भूमि उपयोग, यातायात, आधारभूत सुविधाओं, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों को अधिकारियों के समक्ष रखा।

राजधानी के भविष्य को लेकर बढ़ रही जनभागीदारी

एमडीडीए द्वारा आयोजित जनसुनवाई शिविरों में लगातार बढ़ रही नागरिक भागीदारी इस बात का संकेत है कि लोग अपने शहर के भविष्य को लेकर गंभीर हैं। दसवें दिन भी विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिकों, व्यापारिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और भू-स्वामियों ने महायोजना के विभिन्न पहलुओं पर अपनी राय रखी। प्रतिभागियों ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच देहरादून को सुनियोजित विकास की आवश्यकता है, ताकि आने वाले वर्षों में यातायात, आवास, जलापूर्ति और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़ी चुनौतियों का प्रभावी समाधान किया जा सके।

यातायात, पार्किंग और आधारभूत ढांचे पर विशेष जोर

जनसुनवाई के दौरान नागरिकों ने शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव और पार्किंग की समस्या को प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाया। लोगों ने सुझाव दिया कि महायोजना में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सड़क नेटवर्क का विस्तार, बहुस्तरीय पार्किंग, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा वैकल्पिक यातायात मार्ग विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाए। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।

पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन की मांग

संवाद के दौरान पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। नागरिकों ने हरित क्षेत्रों, जल स्रोतों, नदियों और खुले सार्वजनिक स्थलों के संरक्षण के लिए ठोस प्रावधान करने की मांग की। प्रतिभागियों का कहना था कि विकास कार्यों के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है। कई लोगों ने वर्षा जल निकासी, जलभराव की समस्या और भूजल संरक्षण से जुड़े सुझाव भी दिए।

स्थानीय जरूरतों के अनुरूप हो विकास की योजना

भू-स्वामियों और संस्थागत प्रतिनिधियों ने क्षेत्र विशेष की आवश्यकताओं के अनुरूप भूमि उपयोग प्रस्तावों और विकास नियंत्रण नियमों पर अपने विचार साझा किए। एमडीडीए की तकनीकी टीम ने सभी सुझावों एवं आपत्तियों को दर्ज करते हुए भरोसा दिलाया कि प्रत्येक बिंदु का विशेषज्ञ स्तर पर परीक्षण किया जाएगा और व्यवहारिक सुझावों को महायोजना में समुचित महत्व दिया जाएगा।

20 जुलाई को सेक्टर-11 की होगी जनसुनवाई

एमडीडीए द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार देहरादून महायोजना-2041 के अंतर्गत सेक्टर-11 की जनसुनवाई 20 जुलाई 2026 को राजकीय बालिका पॉलिटेक्निक कॉलेज, सुद्धोवाला, देहरादून (Government Girls Polytechnic College Sudhowala Dehradun)में आयोजित की जाएगी। प्राधिकरण ने संबंधित क्षेत्र के नागरिकों, संस्थाओं, भू-स्वामियों एवं हितधारकों से निर्धारित तिथि और समय पर उपस्थित होकर अपने सुझाव एवं आपत्तियां दर्ज कराने की अपील की है। अधिकारियों का मानना है कि व्यापक जनभागीदारी से तैयार होने वाली महायोजना राजधानी के संतुलित, सुव्यवस्थित और सतत विकास की मजबूत आधारशिला बनेगी।

जनभागीदारी से मजबूत होगी महायोजना : बंशीधर तिवारी

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून महायोजना-2041 केवल एक विकास दस्तावेज नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए राजधानी की व्यापक विकास दृष्टि है। उन्होंने कहा कि नागरिकों से प्राप्त सुझाव योजना को अधिक व्यावहारिक, प्रभावी और जनहितकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनका कहना था कि जनभागीदारी ही किसी भी शहर के सुनियोजित विकास की सबसे बड़ी ताकत होती है।

हर सुझाव का होगा तकनीकी और विधिक परीक्षण : मोहन सिंह बर्निया

एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि जनसुनवाई के दौरान प्राप्त सभी सुझावों और आपत्तियों का व्यवस्थित अभिलेखीकरण किया जा रहा है। विशेषज्ञों द्वारा उनका तकनीकी एवं विधिक परीक्षण किया जाएगा, ताकि अंतिम महायोजना विकास, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं के बीच संतुलन स्थापित करते हुए भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा कर सके।

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