सती शिरोमणि माता अनसूया की देव डोली गर्भगृह में प्रतिष्ठापित

लक्ष महायज्ञ तथा श्रीमद देवी भागवत कथा का समापन

गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिला मुख्यालय गोपेश्वर के समीपवर्ती खल्ला गांव में सती शिरोमणि माता अनसूया देवी की देवरा यात्रा के निमित्त लक्ष महायज्ञ तथा श्रीमद देवी भागवत कथा के समापन पर मां अनसूया तथा ज्वाला देवी को अश्रुपूर्ण विदाई दी गई। इसके साथ ही दोनों देव डोलियां अपने-अपने गर्भगृह में प्रतिष्ठापित हो गई है।

बताते चले कि 51 सालों बाद खल्ला गांव में स्थित सती शिरोमणि माता अनसूया की रथ डोली बीते विजयादशमी के पर्व से देवरा यात्रा पर निकली थी। देवरा यात्रा के निमित्त खल्ला गांव में लक्ष महायज्ञ तथा श्रीमद देवी भागवत कथा का आयोजन किया गया। इस धार्मिक आयोजन में कठूड गांव की मां ज्वाला देवी की उत्सव डोली ने भी प्रतिभाग किया। भागवत कथा के समापन में पूर्णाहुति का कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें श्रद्धालुओं ने आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। पूर्णाहुति का समापन होते ही मां अनसूया तथा मां ज्वाला को श्रद्धालुओं ने अश्रुपूर्ण विदाई दी। दोनों देव डोलियों की विदाई का यह अवसर काफी भावपूर्ण रहा। इसके तत्काल बाद मां अनसूया देवी अपने गर्भगृह में प्रतिष्ठापित हुई। मां ज्वाला की उत्सव डोली भी आयोजन स्थल से सीधे कठूड गांव पहुंची। धार्मिक रीति रिवाजों के बीच ज्वाला देवी की उत्सव डोली भी गर्भगृह में विराजमान हो गई। करीब 51 सालों बाद आयोजित हुए इस कार्यक्रम का दीदार करने के लिए तमाम क्षेत्रों से हजारो लोगों ने आयोजन में पहुंच कर सुख समृद्धि की मनौती मांगी। व्यास आचार्य मनोज चमोली तथा यज्ञाचार्य डा. चंद्रशेखर तिवारी के नेतृत्व में धार्मिक रीति रिवाजों और परंपराओं का संपादन किया गया।

इस दौरान देवरा यात्रा समिति के अध्यक्ष बीरेंद्र सिंह नेगी तथा ग्राम धर्मस्व समिति के अध्यक्ष अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी ने इस देवरा यात्रा की निर्विघ्न तथा कुशलता पूर्वक संचालित होने पर सभी श्रद्धालुओं का आभार जताया। आयोजन में करीब चार सौ से अधिक ध्याणियों (विवाहिता बहिनों) ने प्रतिभाग किया। सभी ध्याणियों को ध्याणी भोज के साथ ही मां अनसूया का प्रसाद भी प्रदान किया गया। खल्ला गांव के सभी लोगों ने आयोजन को भव्य बनाकर एक मिशाल भी पेश की। बाहर से आए श्रद्धालुओं का स्वागत सत्कार तो किया ही गया अपितु सभी को माता अनसूया का प्रसाद भी भेंट किया गया। इस यादगार आयोजन के निपटने के बाद कार्यक्रम की सफलता पर सभी लोग अभिभूत हो उठे। दोनों देव डोली की विदाई का अवसर इस कदर भावपूर्ण रहा कि लोगों के आंसू थमने का नाम नहीं ले पा रहे थे। अब गुरूवार को वनजगदी का आयोजन होगा। इसमें भी पूजा अर्चना कर धार्मिक परंपराओं और रीति रिवाजों का निर्वहन होगा।

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