हरदा का ‘अर्जित अवकाश’-मैं जा भी रहा हूं और यहीं भी हूं…5G के जमाने में 2G नेटवर्क

  • प्रदीप रावत ‘रंवाल्टा’ 

उत्तराखंड की सियासत में हरीश रावत एक ऐसे किरदार बन चुके हैं, जो राजनीति से “अर्जित अवकाश” लेने की घोषणा तो करते हैं, लेकिन अवकाश पर जाने से पहले ही अगली पारी की रणनीति भी तैयार रखते हैं। मानो यह अवकाश कम और “पॉलिटिकल टी-ब्रेक” ज्यादा हो, जहां चाय की चुस्की के साथ अगली चाल की बिसात बिछाई जाती है।

हरदा की महत्वाकांक्षा का हाल कुछ ऐसा है कि राजनीति उनके लिए शतरंज का खेल नहीं, बल्कि “अनंत टेस्ट मैच” है, जहां रिटायरमेंट का सवाल ही नहीं उठता। उम्र भले ही अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रही हो, लेकिन उनकी राजनीतिक ऊर्जा ऐसी है जैसे घड़ी की सुइयों को भी पीछे घुमा दें। फर्क बस इतना है कि कभी-कभी चालें इतनी पुरानी हो जाती हैं कि नई पीढ़ी उन्हें “रेट्रो स्टाइल” समझने लगती है।

आज हालात यह हैं कि कांग्रेस के भीतर नई पीढ़ी “अपडेटेड सॉफ्टवेयर” बनने की कोशिश कर रही है, जबकि हरदा अभी भी “क्लासिक वर्जन” को ही सबसे भरोसेमंद मानते हैं। समस्या यह नहीं कि उनका अनुभव कम हो रहा है, बल्कि यह है कि वह अनुभव अब हर स्थिति में “डिफॉल्ट सेटिंग” की तरह लागू किया जा रहा है, चाहे सिस्टम उसे सपोर्ट करे या नहीं।

इधर गणेश गोदियाल, प्रीतम सिंह और हरक सिंह रावत की “त्रिमूर्ति” मैदान में उतर चुकी है। यह नई तिकड़ी राजनीति को 5G स्पीड से चलाना चाहती है, जबकि हरदा अभी भी 2G नेटवर्क पर भरोसा जता रहे हैं, जहां कॉल तो जुड़ जाती है, पर कभी-कभी आवाज साफ नहीं आती।

हरदा की दुविधा भी कम दिलचस्प नहीं है, एक तरफ वह “अवकाश” की बात करते हैं, दूसरी तरफ पार्टी के हर छोटे-बड़े फैसले में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना भी जरूरी समझते हैं। मानो संदेश साफ हो: “मैं जा भी रहा हूं और यहीं भी हूं।”

उनकी उम्र को लेकर उठते सवालों पर भी हरदा का अंदाज निराला है। राजनीति में जहां लोग 60 के बाद सलाहकार बन जाते हैं, वहां हरदा अब भी खुद को “ओपनिंग बैट्समैन” मानते हैं, भले ही टीम के बाकी खिलाड़ी उन्हें “मेंटॉर” की भूमिका में देखना चाहते हों।

कुल मिलाकर, हरदा की राजनीति एक ऐसी फिल्म बन चुकी है, जिसका इंटरवल कई बार हो चुका है, लेकिन क्लाइमेक्स आने का नाम नहीं ले रहा। दर्शक (यानी कार्यकर्ता) कभी ताली बजाते हैं, कभी सिर पकड़ लेते हैं और निर्देशक (पार्टी हाईकमान) अब भी सोच रहा है कि आखिर इस कहानी का अंत कैसे लिखा जाए।

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