LPG सिलेंडर तो हो गया महंगा, क्या अब पेट्रोल-डीजल की है बारी?

नई दिल्ली: ईरान-इजरायल युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल के कारण घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) ने शनिवार (7 मार्च) से 14.2 किलो के गैर-सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 60 रुपये बढ़ा दी है। अब दिल्ली में यह सिलेंडर 913 रुपये में उपलब्ध होगा, जबकि पहले यह 853 रुपये का था।

यह बढ़ोतरी पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में चल रहे संघर्ष के कारण आई है, जहां ईरान के साथ तनाव बढ़ने से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते एलपीजी और क्रूड ऑयल की सप्लाई प्रभावित हुई है। भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 80-85% आयात करता है, जिसमें मध्य पूर्व (कतर, यूएई, सऊदी अरब आदि) से बड़ा हिस्सा आता है। युद्ध के कारण आयात में बाधा और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल ने कंपनियों को कीमतें संशोधित करने के लिए मजबूर किया।

शहर-वार नई कीमतें (14.2 किलो घरेलू सिलेंडर, गैर-सब्सिडी)

  • दिल्ली: 913 रुपये (पहले 853 रुपये)
  • मुंबई: 912.50 रुपये (पहले 852.50 रुपये)
  • कोलकाता: 930 रुपये (पहले 879 रुपये)
  • चेन्नई: 928.50 रुपये (पहले 868.50 रुपये)

कमर्शियल सिलेंडर पर भी असर

19 किलो के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 114.50-115 रुपये बढ़ाई गई है। दिल्ली में अब यह 1,883 रुपये का हो गया है (पहले 1,768.50 रुपये)। इससे होटल, रेस्तरां और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। यह बढ़ोतरी 11 महीनों में दूसरी बार है। पिछली बार अप्रैल 2025 में 50 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। हालांकि, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 300 रुपये की सब्सिडी मिलती रहेगी, जिससे उनकी कीमत प्रभावित नहीं होगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए कोई राशनिंग या सप्लाई कटौती नहीं होगी। रिफाइनरियों से घरेलू उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं और वैकल्पिक स्रोतों (जैसे अमेरिका से) से आयात बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि ऊर्जा उपलब्धता और किफायती मूल्य सुनिश्चित करने के सभी कदम उठाए जा रहे हैं।

यह बढ़ोतरी आम घरों की रसोई पर सीधा असर डालेगी, खासकर मध्यम वर्ग पर जहां एलपीजी मुख्य ईंधन है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचा तो क्रूड ऑयल की कीमतों के साथ एलपीजी पर और दबाव बढ़ सकता है, जिससे मुद्रास्फीति प्रभावित हो सकती है।

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