जरूरतमंदों को मिला नया जीवन आधार, मजबूत हुआ महिला एवं बाल संरक्षण तंत्र

पौड़ी : जनपद पौड़ी गढ़वाल में महिला एवं बाल विकास/कल्याण विभाग द्वारा विगत वित्तीय वर्ष में पुनर्वास, संरक्षण एवं सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं। विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों के माध्यम से जरूरतमंद महिलाओं एवं बच्चों को सुरक्षा, संबल एवं मुख्यधारा से जोड़ने के प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।

 

कोटद्वार स्थित महिला कल्याण पुनर्वास केंद्र में वर्ष के दौरान 28 संवासिनियों को आश्रय प्रदान किया गया, जिनमें पॉक्सो से प्रभावित बालिकाएं भी शामिल थीं। इन सभी को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ काउंसलिंग एवं शिक्षा के माध्यम से उनके आत्मविश्वास को सुदृढ़ किया गया। इनमें से 22 संवासिनियों का सफलतापूर्वक उनके परिवारों के साथ पुनर्वास किया गया।

जिला बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत कुल 183 मामलों का समयबद्ध निस्तारण करते हुए शून्य लंबितता सुनिश्चित की गयी है। इसके अंतर्गत 31 लापता बच्चों को उनके परिजनों से मिलाया गया तथा 56 बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया। विभाग द्वारा पुलिस एवं अन्य संबंधित संस्थाओं के समन्वय से चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 से लेकर किशोर न्याय बोर्ड तक प्रभावी तंत्र विकसित किया गया है, जिससे त्वरित सहायता एवं न्याय सुनिश्चित हो सके।

जनजागरुकता के क्षेत्र में विभाग द्वारा 55 अभियान संचालित किए गए, जिनके माध्यम से बाल विवाह, साइबर अपराध एवं अन्य सामाजिक कुरीतियों के प्रति आमजन को जागरूक किया गया। साथ ही आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्र में भी विभाग द्वारा उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं। समाज कल्याण विभाग के समन्वय से 16,922 विधवा महिलाओं को पेंशन का लाभ प्रदान किया गया है। इसके अतिरिक्त परित्यक्ता महिलाओं को भी पेंशन योजनाओं से आच्छादित किया गया है। मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना एवं स्पॉन्सरशिप योजनाओं के अंतर्गत जरूरतमंद बच्चों को आर्थिक सहायता प्रदान कर उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने के प्रयास भी किए गए हैं। इसके साथ ही ‘पुअर प्रिजनर स्कीम’ के तहत आर्थिक रूप से कमजोर बंदियों की स्थिति का आकलन कर उन्हें विधिक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया गया है।

जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने बताया कि जनपद में महिला एवं बाल संरक्षण से जुड़े प्रत्येक प्रकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विभागों के समन्वय से पुनर्वास, संरक्षण और सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि प्रत्येक लाभार्थी को आत्मनिर्भर बनाकर उसे समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। जिलाधिकारी ने बताया कि बाल संरक्षण, महिला सुरक्षा और सामाजिक न्याय से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है तथा भविष्य में भी इस दिशा में और अधिक सुदृढ़ व्यवस्था विकसित की जाएगी।

जिला परिवीक्षा अधिकारी अरविंद कुमार ने बताया कि जनपद में महिला एवं बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में जमीनी स्तर पर सतत निगरानी रखी जा रही है। प्रत्येक प्रकरण में काउंसलिंग, पुनर्वास और पारिवारिक पुनर्स्थापन पर विशेष फोकस किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों के समन्वय से त्वरित हस्तक्षेप सुनिश्चित करते हुए जरूरतमंद बच्चों और महिलाओं को समय पर सहायता उपलब्ध करायी जा रही है।

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