मुख्य फार्मेसी अधिकारी महाबीर रवांल्टा सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त, स्वास्थ्य सेवा में 37 वर्षों का गौरवशाली सफर पूर्ण

पुरोला/उत्तरकाशी। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पुरोला में मुख्य फार्मेसी अधिकारी के पद पर कार्यरत श्री महाबीर रवांल्टा  शनिवार 29 मई  को 37 वर्ष 4 माह 6 दिन की दीर्घ, निष्कलंक एवं प्रेरणादायी शासकीय सेवा पूर्ण कर सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हो गए। इस अवसर पर स्वास्थ्य केन्द्र परिवार, सहकर्मियों एवं क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने उन्हें भावभीनी विदाई देते हुए उनके योगदान को याद किया।

10 मई 1966 को उत्तरकाशी जनपद के सीमांत गांव सरनौल में जन्मे महाबीर रवांल्टा ने कठिन परिस्थितियों के बीच अपनी शिक्षा पूरी की। प्रारंभिक शिक्षा महरगांव में प्राप्त करने के बाद उन्होंने राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय जोशियाड़ा में जनपद स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त किया। इसके बाद राजकीय कीर्ति इंटर कॉलेज उत्तरकाशी से इंटरमीडिएट की शिक्षा पूरी की। पारिवारिक चुनौतियों और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने शिक्षा और सेवा के प्रति अपने संकल्प को कभी कमजोर नहीं होने दिया।

फार्मेसी में डिप्लोमा प्राप्त करने के बाद उन्होंने स्वास्थ्य सेवा को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। साथ ही उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त कर अपनी शैक्षणिक यात्रा को भी आगे बढ़ाया। अपने सेवाकाल की शुरुआत 25 जनवरी 1989 को स्पेशल पुलिस फोर्स, के साथ उत्तरप्रदेश के  मुरादाबाद से करने वाले रवांल्टा ने भारत-तिब्बत सीमा के दुर्गम क्षेत्रों में भी सेवाएं दीं। वहां उन्होंने सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और ‘सीमा प्रहरी’ स्मारिका के संपादन सहित विभिन्न आयोजनों के लिए सम्मानित हुए।

25 सितंबर 1991 से स्वास्थ्य विभाग में अपनी सेवाएं देते हुए उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र धरपा एवं वैरा फिरोजपुर सहित कई स्थानों पर कार्य किया। रोगियों के प्रति उनका आत्मीय व्यवहार, सहज उपलब्धता और निस्वार्थ सेवा भाव उन्हें जनता के बीच अत्यंत लोकप्रिय बनाता रहा। पल्स पोलियो जैसे राष्ट्रीय अभियानों में उनकी सक्रिय भूमिका को विशेष रूप से सराहा गया।

उत्तराखंड गठन के बाद उत्तराखंड लौट आए, वर्ष 2010 में उनकी तैनाती अति प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र आराकोट में हुई, जहां उन्होंने अत्यंत विषम परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन किया। चिकित्सक के अभाव में वर्षों तक केन्द्र की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने परिवार नियोजन, नेत्र शिविर, कोविड-19 टीकाकरण, मिजल्स-रुबेला अभियान सहित अनेक राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक संचालित किया।

जखोल, ओसला, लिवाड़ी, सिरगा, डामटी और अन्य दुर्गम गांवों तक पैदल पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही। वर्ष 2013 की आपदा और 2019 की आराकोट त्रासदी जैसे कठिन समय में भी उन्होंने अग्रिम पंक्ति में रहकर अपने दायित्वों का निर्वहन किया।

17 फरवरी 2025 को मुख्य फार्मेसी अधिकारी के रूप में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पुरोला में कार्यभार ग्रहण करने के बाद भी उन्होंने अपनी कार्यकुशलता, अनुशासन और सकारात्मक कार्यशैली से संस्थान को नई ऊर्जा प्रदान की। अल्प कार्यकाल के बावजूद उन्होंने सहकर्मियों और आमजन के बीच अपनी विशेष पहचान बनाई।

स्वास्थ्य सेवा के अतिरिक्त साहित्य, लोकसंस्कृति और रंगमंच के क्षेत्र में उनकी सक्रियता भी उन्हें एक बहुआयामी व्यक्तित्व के रूप में स्थापित करती है। उनके योगदान को याद करते हुए स्वास्थ्य केन्द्र परिवार ने उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं सुखद भविष्य की कामना की।

विदाई समारोह में वक्ताओं ने कहा कि महाबीर रवांल्टा का सेवाकाल केवल सरकारी दायित्वों के निर्वहन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने सेवा, समर्पण, मानवीय संवेदनाओं और लोकमंगल के उच्च आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात कर समाज के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनके अनुभव, मार्गदर्शन और कर्मनिष्ठा आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।

 

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